एक्यूप्रेशर शरीर की सतह पर स्थित विभिन्न प्रमुख बिंदुओं को स्टिम्युलेट करने की तकनीक पर आधारित शायद दुनिया की सबसे पुरानी इलाज की – विधियों में से एक है , जिसमें दर्द या कष्ट से छुटकारा पाने के लिए तैयार किया है | आप इसका उपयोग करने के लिए कुछ चार्ट का सहारा ले सकते हैं | जो मैं आपके साथ इस पोस्ट में साझा कर रहा हूँ ,चार्ट के अंदर बताये व् दिखाए एक्यू प्वॉइंट्स / ट्रिंगर प्वॉइंट्स को दबाया जाता है । यह माना जाता है कि मानव – शरीर में अपने आपमें बिमारिओं को ठीक करने की अत्यधिक क्षमता होती है ।

Acupressure chart foot and hand

जब भी शरीर के भीतरी के अंगों से जुड़े हुए ‘ रिफ्लेक्स प्वॉइंट्स ‘ को दबाया जाता है , वे तेज गति से काम करने लग जाते हैं तथा जिसके कारण दर्द और कष्ट दूर हो जाते हैं , जिन्हें ऊर्जा ठीक करने का सूचक माना जाता है, तथा मरीज राहत महसूस करता है । यह सब कैसे हासिल किया जाता है ? एक साधारण सी भाषा में यह कहा जा सकता है कि जब मुखीय ‘ रिफ्लेक्स बिंदु ‘ पर दबाव डाला जाता है , तो मांसपेशीयों में तनाव उत्पन्न होता है और इससे रक्त का प्रवाह तेज बनता है । इस तरह शरीर की प्राण-शक्ति को यह विधि तेज करके रोग-मुक्ति में सहायक होती है ।

एक्यूप्रेशर ’ एक लैटिन भाषा का शब्द है जिसमें ‘ एक्यू ‘ का अर्थ है- अंगूठा , जबकि प्रेशर का अर्थ है दबाव । यह स्वतः स्पष्ट है । इस तकनीक से इलाज करने में अँगूठे या उँगलियों का उपयोग करते हुए विभिन्न चुनिंदा रिफ्लेक्स प्वॉइंट्स पर दबाव दिया जाना जरूरी है । परंतु यदि कम समय में बहुत से मरीजों का इलाज करना हो , तो चिकित्सक की ऊर्जा बचाए रखने के लिए इस के लिए एक्यूप्रेशर के कुछ उपकरणों के जरिए भी दबाव दिया जा सकता है । इन उपकरण के बारे में प्रोडक्ट पेज पर पूरी जानकारी ले सकते हैं |

5000 से भी अधिक वर्षों के दौरान की गई खोजों / अवलोकनों के आधार पर शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़े ‘ रिफ्लेक्स प्वॉइंट्स ‘ की पहचान मुख्य रूप से हथेलियों और तलवों पर की गई है । आमतौर पर ये एक्यूप्वॉइंट्स जोड़ों में आते हैं । लेकिन ये दो अंग जो हैं heart और यकृत (liver ) अपवाद है । दिल से संबंधित रिफ्लेक्स बिंदु बाएँ तलवे और बाईं हथेली पर तथा लिवर के मामले में वे दाईं हथेली और दाएँ तलवे के अन्दर मोजूद होते हैं।

समय बीतने के साथ – साथ ठीक इस कारण से कि इसमें किसी दवाई / सर्जरी की जरूरत न होने से यह उनके दुष्प्रभावों से पूरी तरह मुक्त है , एक्यूप्रेशर को बहुत महत्त्व मिलने लगा है । वह पूरी तरह से परंपरागत चिकित्सा विधि से दुष्प्रभाव रहित अन – अतिक्रमणकारी और अहस्तक्षेपी है । इसके अतिरिक्त , विभिन्न रोगियों के साथ 8 वर्षों से अधिक का मेरा अनुभव दरशाता है कि यह चिकित्सा पद्धति , अगर मैं कुछ नाम गिनाऊँ तो सर्वाइकल / लंबर स्पॉन्डिलाइटिस , साइनसाइटिस , पीठदर्द , घुटनों का दर्द , तलवों का दर्द , साइटिका , प्रोलेप्स्ड डिस्क , अनिद्रा , अवसाद , टेनिस एल्बो , दमा , उच्च रक्तचाप , माइग्रेन , आदि यानि न्यूरो से जुडी हुई मरीजों को ठीक करने में बहुत कारगर है ।

सीखने और उपयोग में लाने में बहुत ही आसान इस इलाज थेरेपी के लाभों को देखकर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के थेरेपिस्ट भी इसके प्रति खुलने व् सरहाना करने लगे हैं । मेरा 8 साल का अनुभाव के कारण मुझे ये असंदिग्ध रूप से सिद्ध हो चुका है कि जिन मामलों में किसी भी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली से मरीजों को लाभ नही हुआ जब उनके साथ एक्यूप्रेशर पद्धति से इलाज किया गया , तो वहाँ परिणाम तीव्रतर और कभी – कभी तो अविश्वसनीय रहे हैं । इसका एक और लाभ यह है कि किसी प्रकार के दुष्प्रभाव से डरे बिना इस सस्ती चिकित्सा विधि का उपयोग एक घरेलू उपचार के तौर पर करने के लिए बहुत कम बुद्धि के व्यक्ति को भी सिखाया जा सकता है ।

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